Apr 05, 2026

निवेशकों को अप्रैल का झटका: 2 दिन में ₹19,837 करोड़ की निकासी

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नई दिल्ली। अप्रैल महीने की शुरूआत से ही भारतीय शेयर बाजार को झटके पर झटके लग रहे हैं। नए वित्त वर्ष से जहां निवेशकों को नई उम्मीदें थीं, वहीं बाजार में अचानक आई गिरावट ने माहौल बदल दिया है। दरअसल, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी एफपीआई ने बाजार से बड़े पैमाने पर पैसा निकालना शुरू कर दिया है। अप्रैल के शुरुआती सिर्फ दो कारोबारी दिनों में ही करीब ₹19,837 करोड़ की निकासी ने निवेशकों को चौंका दिया है। यह गिरावट कोई एक दिन की घटना नहीं है, बल्कि पिछले कुछ महीनों से जारी दबाव का परिणाम है। मार्च 2026 में ही विदेशी निवेशकों ने रिकॉर्ड ₹1.17 लाख करोड़ बाजार से निकाल लिए थे, जो भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में सबसे बड़ी बिकवाली में से एक माना जा रहा है। अगर पूरे साल 2026 की बात करें, तो अब तक कुल ₹1.5 लाख करोड़ से ज्यादा की निकासी हो चुकी है। यह आंकड़ा साफ तौर पर बाजार में बढ़ते डर और अनिश्चितता को दर्शाता है।

आखिर क्यों भाग रहे हैं विदेशी निवेशक?
पहली और सबसे बड़ी वजह है मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव। युद्ध और भू-राजनीतिक संकट के माहौल में निवेशक जोखिम भरे बाजारों से दूरी बनाकर सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख करते हैं। दूसरी बड़ी चिंता है कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें। जब तेल $100 प्रति बैरल के पार चला जाता है, तो भारत जैसे आयात पर निर्भर देश की अर्थव्यवस्था पर इसका सीधा असर पड़ता है। इससे महंगाई बढ़ती है और बाजार पर दबाव बनता है। तीसरी वजह है गिरता हुआ भारतीय रुपया। डॉलर के मुकाबले रुपये में करीब 4 प्रतिशत की गिरावट विदेशी निवेशकों के लिए नुकसान का संकेत बन जाती है, जिससे वे अपने निवेश को सुरक्षित निकालना बेहतर समझते हैं। इसके अलावा अमेरिका के बॉन्ड मार्केट का आकर्षण भी बढ़ गया है। जब वहां बेहतर और सुरक्षित रिटर्न मिल रहा हो, तो निवेशक इक्विटी बाजार से पैसा निकालकर बॉन्ड में लगाना ज्यादा सुरक्षित मानते हैं। विशेषज्ञों की मानें तो यह दौर चुनौतियों से भरा जरूर है, लेकिन इसमें अवसर भी छिपे हैं। बाजार में लगातार गिरावट के चलते कई अच्छे शेयर अब आकर्षक कीमतों पर उपलब्ध हो गए हैं। हालांकि बाजार में स्थिरता तभी लौटेगी जब वैश्विक तनाव कम होगा, खासकर मिडिल ईस्ट की स्थिति सामान्य होगी और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आएगी। फिलहाल निवेशकों के लिए यह समय सतर्क रहने और सोच-समझकर फैसले लेने का है, क्योंकि बाजार में उतार-चढ़ाव अभी जारी रह सकता है।