डिफरेंशियल टीबी केयर शत प्रतिशत करने पर जोर,
टीपीटी उपचार से एक भी संपर्कजन वंचित न रहे, दी हिदायत,
रूद्रप्रयाग। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डाॅ. पारूल गोयल ने वर्चुअल माध्यम से प्रभारी चिकित्सा अधिकारियों, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी, ब्लाक कार्डिनेटर आशा कार्यक्रम, आशा फेसिलिटेटर की बैठक लेकर टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत संचालित गतिविधियों की समीक्षा कर जरूरी निर्देश दिए।
बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डाॅ. पारूल गोयल ने उच्च जोखिम समूह की टीबी स्क्रीनिंग सुनिश्चित करने पर विशेष जोर देते हुए सभी की टीबी स्क्रीनिंग सुनिश्चित करने के लिए आशाओं के माध्यम से सर्वे करने व उन लोगों को टीबी स्क्रीनिंग एवं एक्स-रे जांच के लिए निकटतम चिकित्सालयों में जाने हेतु जागरूक एवं संवेदीकृत करने के भी निर्देश दिए। जिला क्षय अधिकारी डाॅ. कुणाल चौधरी ने बताया गया कि 60 वर्ष से अधिक आयुवर्ग के मदिरापान व धूम्रपान करने वाले, मधुमेह रोगी, उच्च रक्तचाप वाले व्यक्ति, पिछले पांच वर्ष के टीबी रोगी तथा पिछले दो वर्ष से टीबी रोगियों के संपर्कजन तथा तथा केंद्रीय क्षय अनुभाग, भारत सरकार द्वारा चिन्हित उच्च जोखिम श्रेणी वाले 156 गांवों के 14 वर्ष से अधिक आयुवर्ग केे उच्च जोखिम वर्ग में 108562 शामिल हैं जिसके सापेक्ष 54813 लोगों की स्क्रीनिंग हो चुकी है। टीबी रोगियों की पहचान व उन्हें उपचार से जोड़ने, निक्षय मित्रों के सामुदायिक सहयोग को बढ़ाने के लिए टीबी मुक्त भारत ऐप के अंतर्गत खुशी चौटबोट का अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार और उपयोग करने के लिए समस्त सीएचओ व आशा कार्यकर्ताओं को निर्देशित किया गया।
उन्होंने समस्त सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों को अपने कार्यक्षेत्र में आयोजित होने वाले स्वास्थ्य शिविरों में नियमित रूप से टीबी स्क्रीनिंग करने, टीबी के लक्षण वाले सभी संभावित रोगियों को बलगम जांच के लिए निकटतम चिकित्सा इकाई में संदर्भित करने के निर्देश दिए। डिफरेंशियल टीबी केयर अर्थात टीबी रोगियों की सहरूग्णताओं के आंकलन, उनकी चिकित्सकीय आवश्यकताओं के अनुरूप संबंधित बीमारियों के उचित प्रबंधन एवं नियमित फॉलोअप पर भी विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान जिला क्षय अधिकारी डाॅ. कुणाल ने बताया कि जनपद में टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत 07 दिसंबर 2024 से वर्तमान तक अधिसूचित 852 टीबी रोगियों के सापेक्ष 87 प्रतिशत रोगियों का डिफरेंशियल टीबी केयर किया जा चुका है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने शेष टीबी रोगियों का भी डिफरेंशियल टीबी केयर सुनिश्चित करने तथा उनकी समस्त सूचनाओं को समयबद्ध रूप से निक्षय पोर्टल पर अपडेट करने के निर्देश दिए।
टीबी से बचाव के लिए टीबी प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट (टीपीटी) की समीक्षा के दौरान डीपीसी मुकेश बगवाड़ी ने बताया कि जनपद में शत-प्रतिशत टीबी रोगियों के संपर्कों का सत्यापन करते हुए उनकी समयबद्ध स्क्रीनिंग की गई है तथा पात्र व्यक्तियों को टीपीटी उपचार पर लाया गया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने टीपीटी उपचार के प्रति विशेष सजगता बरतने के निर्देश देते हुए कहा कि कोई भी पात्र व्यक्ति उपचार से वंचित न रहे।
टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत जिला चिकित्सालय रुद्रप्रयाग में व्यापार सभा, टैक्सी एवं जीप यूनियन व विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े प्रतिनिधियों के साथ बैठक आयोजित कर टीबी रोगियों के उपचार एवं पोषण सहायता में निक्षय मित्रों की महत्वपूर्ण भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई। इस मौके पर टीबी रोगियों को उपचार के साथ-साथ आवश्यक पोषण सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से अधिक से अधिक लोगों को निक्षय मित्र बनने के लिए प्रेरित करने के साथ एचआईवी/एड्स के बचाव व रोकथाम के बारे में जागरूक किया गया। कार्यक्रम में 07 लोगों ने निक्षय मित्र बनने पर सहमति व्यक्त करते हुए टीबी रोगियों को पोषण सहायता प्रदान करने की दिशा में कदम बढ़ाया।
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डाॅ. एस.के. द्विवेदी एवं जिला क्षय अधिकारी डा. कुणाल चौधरी, एमओडीटीसी अंकित बगवाड़ी ने निक्षय मित्र बनने वाले सभी लोगों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में जनसहभागिता की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने अधिकाधिक टीबी रोगियों को पोषण सहायता उपलब्ध कराने के लिए समस्त संगठनों के प्रतिनिधियों से अपनी-अपनी संस्थाओं के अधिक से अधिक सदस्यों को निक्षय मित्र बनने के लिए प्रेरित करने का अनुरोध किया।
इस मौके पर व्यापार सभा के अध्यक्ष लक्ष्मण सिंह बिष्ट, कोषाध्यक्ष आशीष, सभासद नरेंद्र रावत, टैक्सी यूनियन के अध्यक्ष अजीत राणा, मंदाकिनी जीप यूनियन के पूरण सिंह, रूद्रनाथ टैक्सी यूनियन के विपिन सेमवाल आदि मौजूद रहे।

