राष्ट्रीय दलों पर साधा निशाना, 19 नवंबर को काली पट्टी बांधकर काला दिवस मनाने का आह्वान,
रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड की सियासत में बदलाव का बिगुल फूंकते हुए उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) ने आगामी चुनावों के लिए अपनी राजनीतिक सक्रियता तेज कर दी है। दल के केंद्रीय अध्यक्ष सुरेंद्र कुकरेती ने दावा किया कि प्रदेश में बदलाव की लहर चल रही है और जनता अब राष्ट्रीय दलों की राजनीति से निराश होकर उत्तराखंड के हितों की लड़ाई लड़ने वाले क्षेत्रीय दल के साथ खड़ी हो रही है। उन्होंने कहा कि जिस तरह राज्य आंदोलन के दौरान उत्तराखंड की जनता अपने अधिकारों के लिए एकजुट हुई थी, उसी तरह अब राज्य के भविष्य को बचाने के लिए यूकेडी के साथ लामबंद होने की जरूरत है।
उत्तराखंड उत्थान यात्रा के प्रथम चरण में कुमाऊं मंडल का भ्रमण करने के बाद रुद्रप्रयाग पहुंचे यूकेडी केंद्रीय अध्यक्ष सुरेंद्र कुकरेती ने जिला कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत के दौरान भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के 25 वर्षों के शासनकाल में उत्तराखंड की जनता के सम्मान, राज्य आंदोलनकारियों के न्याय और मूलभूत मुद्दों को अपेक्षित प्राथमिकता नहीं मिली।
कुकरेती ने मुजफ्फरनगर कांड के आरोपियों को सजा न मिलने का मुद्दा उठाते हुए कहा कि राज्य आंदोलनकारियों को आज भी न्याय का इंतजार है। वहीं, अंकिता भंडारी प्रकरण का उल्लेख करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि मामले में जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, उन्हें राजनीतिक और संवैधानिक संरक्षण दिए जाने के सवालों पर सरकार को जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की जनता अपने सम्मान और न्याय के सवालों पर अब चुप नहीं बैठ सकती।
यूकेडी अध्यक्ष ने प्रदेश की जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं से 19 नवंबर को बांहों पर काली पट्टी बांधकर विरोध स्वरूप काला दिवस मनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के लोगों को अपने अधिकारों और न्याय के सवालों पर एकजुट होकर आवाज बुलंद करनी होगी। सिक्किम में बंद के आह्वान का उदाहरण देते हुए उन्होंने उत्तराखंड में भी व्यापक जनजागरण और एकजुटता की आवश्यकता पर जोर दिया।
यूकेडी को पार्टी का चुनाव चिह्न ‘कुर्सी’ वापस मिलने से कार्यकर्ताओं में नया उत्साह दिखाई दे रहा है। कुकरेती ने इसे संगठन के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए संकेत दिया कि दल इसी चुनाव चिह्न के साथ चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के जल, जंगल, जमीन, रोजगार, पलायन और मूल निवास जैसे सवालों को लेकर जनता के बीच संघर्ष तेज किया जाएगा।
पत्रकार वार्ता में केंद्रीय महामंत्री एवं मीडिया प्रमुख देवेंद्र चमोली, जिलाध्यक्ष बलबीर चौधरी, केंद्रीय कार्यालय प्रभारी देवचंद्र उत्तराखंडी, प्रकाश भट्ट, कर्नल विनोद नेगी, आशुतोष भंडारी और अर्जुन सिंह कंडारी सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।
अब देखना होगा कि यूकेडी की उत्तराखंड उत्थान यात्रा और बदलाव का यह आह्वान प्रदेश की राजनीति में कितना असर छोड़ता है और जनता के बीच दल अपनी कितनी मजबूत पकड़ बना पाता है।

