चोपता (रुद्रप्रयाग): देवभूमि उत्तराखंड की जड़ों में रची-बसी आस्था जब साक्षात रूप लेती है, तो तर्क मौन हो जाते हैं और केवल भक्ति शेष रह जाती है। कुछ ऐसा ही चमत्कारिक और अलौकिक दृश्य तल्ला नागपुर के चोपता क्षेत्र में चल रही माँ चंडिका की 'बन्याथ' में देखने को मिला। यहाँ आराध्य माँ चंडिका ने न केवल भक्तों को दर्शन दिए, बल्कि अपनी ब्रह्मडोली के माध्यम से आध्यात्मिक कृति 'गढ़ ईश्वरी' का विमोचन कर क्षेत्र के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया।
*देवी ने पलटे पुस्तक के पन्ने* दोपहर के समय जब माँ चंडिका की डोली बणातोली के शांत खेतों में भक्तों को आशीर्वाद दे रही थी, तभी वह क्षण आया जिसका साक्षी बनने की कल्पना शायद ही किसी ने की होगी। लेखक बलदीप सिंह बर्त्वाल द्वारा रचित पुस्तक 'गढ़ ईश्वरी' को जब माँ के सम्मुख रखा गया, तो माँ की ब्रह्मडोली ने दिव्य ऊर्जा के साथ पुस्तक के पृष्ठों को स्पर्श कर उन्हें पलटा। यह माँ की ओर से अपने भक्त की लेखनी को दिया गया सर्वोच्च सम्मान और आशीर्वाद था। लेखक बलदीप बर्त्वाल के लिए यह क्षण ईश्वरीय कृपा का साक्षात अनुभव बन गया।वेदपाठ की गूँज और महायज्ञ का ताप जहाँ एक ओर विमोचन की इस घटना ने सबको मंत्रमुग्ध किया, वहीं दूसरी ओर महायज्ञ की पवित्र अग्नि निरंतर प्रज्वलित है। बैंजी, मायकोटी, चोंड और क्यूड़ी से आए विद्वान वेदपाठी ब्राह्मणों के सस्वर मंत्रोचार ने पूरे वातावरण को शुद्ध और ऊर्जामय बना दिया है। यज्ञ की आहुतियों के साथ माँ के जयकारे पहाड़ों की चोटियों तक गूँज रहे हैं। पलायन के सन्नाटे के बीच संस्कृति का उत्सव 24 वर्षों बाद आयोजित हो रही इस बन्याथ ने उन गाँवों में प्राण फूँक दिए हैं जो पलायन के कारण सूने पड़ चुके थे। माँ की डोली के पीछे लौटे प्रवासियों की आँखों में अपने घर और अपनी संस्कृति के प्रति वही पुरानी चमक लौट आई है।
वहीं विमोचन कार्यक्रम में पंचकोटी मन्दिर समिति के अध्यक्ष मानवेन्द्र सिंह बर्त्वाल ने कहा कि माता ने पूर्व में लेखक को बन्याथ पर आधारित पुस्तक लिखने की अनुमति दी थी. आज किताब का विमोचन भी माता ने स्वयं ही किया है. जो कि बहुत ही खास है. उन्होंने कहा कि किताब लेखन का कार्य बहुत ही मेहनत का कार्य है. उसे बहुत कम समय में पूरा करना भी सराहनीय है. उन्होंने कहा कि माता ने किताब हेतु लेखक की आर्थिक साहयता का आदेश भी दिया है.
इस अवसर पर समिति के
उपाध्यक्ष दलबीरसिंह राणा, सचिव पूर्णसिंह खत्री, कोषाध्यक्ष यशवंतसिंह नेगी, उप कोषाध्यक्ष सत्येसिंह नेगी, रणजीतसिंह करासी, मगनसिंह नेगी, जगदम्बा प्रसाद बेंजवाल, ग्राम प्रधान फलासी हेमा नेगी, सूरज नेगी, त्रिलोचन भट्ट, जगदीश सिंह बर्त्वाल, सुखदेव बर्त्वाल, मनोज बर्त्वाल सहित सैकड़ों भक्तजन उपस्थित थे.

